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सोमवार, 21 मार्च 2016

0 जीव हत्या पाप नहीं।

||ओ३म्||


मित्रों, आप इस लेख के शीर्षक को देख कर चौंक गए होंगे और सोच रहे होंगे कि ये क्या अनर्गल बात है।
'संजय ' पागल हो गया है या नशे में लिख रहा है ?
पर मित्रो मैं बिलकुल ठीक हूँ और उम्मीद करता हूँ  कि इस लेख को आखिरी तक पढ़ते पढ़ते आप भी मुझसे सहमत होंगे।
ईश्वर ने हमे हर कार्य करने की आजादी दी है यहाँ तक कि हम क्या करे क्या खाये सभी में हम स्वतंत्र है, ईश्वर की तरफ से हम पर कोई रोक टोक नहीं है।
पर सभी कर्मो के फल पाने में हम परतंत्र है ये विषय ईश्वर के अधीन है हमारे अच्छे बुरे कर्मो का फल हमे समयानुसार मिलता रहता है और रहेगा।
पर प्रश्न ये है कि फिर ये पाप पुण्य का क्या चक्कर है ?
क्योंकि आये दिन हमे शाकाहारी मित्रो द्वारा सुनने को मिलता है कि जीव हत्या पाप है और मांसाहारी कहते है कि फिर तो तुम भी पापी हो क्योंकि पेड़ पौधों में भी जीव होता है।
फिर एक बहस और तर्क कुतर्क का दौर चलता है पर अंत में उत्तर कुछ नहीं निकलता दोनों पक्ष अपनी डफली अपना राग अलापते रहते है।
चलिये अब इस विषय को किसी और दृष्टिकोण से समझते है।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

0 मैंने इंसानियत को मरते देखा है।

|| ओ३म् ||
आज मुझे एक गहरी जानकारी एवं अनुभव से रूबरू होना पड़ा और यह ज्ञात हुआ कि इंसान जन्म नहीं लेता है बल्कि इंसान तो बनना पड़ता हैं
बात आज शाम की है यानि कि ४ नवम्बर २०११ की। शाम के करीब ७ बज रहें होंगे, मैं जरा एटीएम जा रहा था, अचानक देखता हूँ की कुछ मुस्लिम लड़के एक गाय को घेर कर खड़े थे जो कि एक पेड़ मे बंधी हुई थी। मुझे समझते देर न लगी कि ये लोग क्या कर रहे हैं, क्यूंकि दो दिन बाद बकरीद है और हफ्ते भर पहले से ही गायों को गाड़ियों में भर भर कर मंजिल (बूचड़-खाना) तक पहुचाना शुरू हो गया था।
मैं सहसा ही रुक गया और उन लोगो के पास जाकर पूछा कि आप लोग ये क्या कर रहे हो ?
इस पर पहले तो वो लोग मुझे ऊपर से नीचे तक घूरने लगे, फिर उनमे से से एक बोला कि पीछे हट जाओ ये गाय मारती है।
मैंने कहा वो तो ठीक है पर ये गाय है किसकी और क्यूँ इसे बांधे रक्खा है ? फिर उनमे से ही एक बोला कि गाय हमारी है और हम इसे चितपुर बाज़ार मस्जिद में ले जा रहे हैं, परसो नीलामी है और यह गाय कुर्बानी के लिए जा रही है।